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तालिबान में धन से फूट डालेगा अमेरिका

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 680 अरब डॉलर के रक्षा विनियोग विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिया है। विधेयक के प्रावधान में अमेरिकी कमांडरों को तालिबानी सरगनाओं को अपने पक्ष में करने के लिए धन का इस्तेमाल करने का अधिकार दिया गया है।

यद्यपि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि धन देकर तालिबान सरगनाओं की वफादारी हासिल करना अस्थाई साबित होगा।

तालिबानी सरगनाओं को भुगतान कमांडरों के इमरजेंसी रेस्पांस प्रोग्राम (सीईआरपी) के तहत किया जाएगा। सीईआरपी के तहत सैन्य अभियान के लिए वर्ष 2010 में 1.3 अरब डॉलर की राशि मुहैया करवाई जाएगी। 

सीआईआरपी के तहत धनराशि का उपयोग कमांडरों के विवेक के आधार पर मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण परियोजनाओं में भी किया जाएगा।

सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के अध्यक्ष कार्ल लेविन के अनुसार तालिबानी सरगनाओं को धन मुहैया कराने का मकसद स्थानीय स्तर पर तालिबान में फूट डालना है। इराक में आतंकवाद पर काबू पाने के लिए भी इसी तरह के कार्यक्रम का सहारा लिया गया था।

सीनेट में 11 सितंबर को लेविन ने कहा,"अफगान नेताओं और हमारी सेना का कहना है कि स्थानीय तालिबानी सरगना विचारधारा या धार्मिक भावना के बजाए रोजगार की जरूरत या स्थानीय नेता के प्रति वफादारी से प्रेरित होते हैं। स्थानीय नेता उन्हें एक निश्चित रकम का भुगतान करता हैं।"

लेविन ने कहा,"अफगान नेताओं और हमारी सेना का मानना है कि तालिबानी सरगनाओं को सरकार के पक्ष में लाने का प्रयास सफल हो सकता है, बशर्ते उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा मुहैया करवाई जाए और हमारे खिलाफ गतिविधियों के लिए उन्हें कोई दंड न दिया जाए।"

अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के शीर्ष कमांडर ने तालिबान के लिए इस योजना का समर्थन किया है।

जनरल स्टेनली मैक्कक्रिस्टल ने 28 जुलाई को ‘लॉस एंजलेस टाइम्स’ के साथ साक्षात्कार के दौरान कहा था,"अफगानिस्तान में ज्यादातर सरगना अफगान हैं। इनके साथ कुछ विदेशी लड़ाके भी हैं।"

स्टेनली के अनुसार, "ज्यादातर सरगना धन के लिए काम कर रहे हैं जबकि कुछ अपने नेता के करिश्माई नेतृत्व से प्रभावित हैं।"

 

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