Prabhat Kiran

Saturday, Sep 04th

Last update:05:36:24 PM GMT

RSS
You are here: होम पेज इन्दौर बत्ती मिलते ही देंगे ‘बत्ती...’

बत्ती मिलते ही देंगे ‘बत्ती...’

E-mail Print PDF

मंत्री और महापौर गुट से जूझ रही इंदौर भाजपा के सामने अब तीसरा शक्ति केंद्र भी महेंद्र हार्डिया के मंत्री बनने से खड़ा हो गया है। सामने आ रहे नगर निगम चुनाव में टिकट बंटवारे में महेंद्र बाबा के पट्‌ठे भी टिकट के लिए मगजमारी करने में पीछे नहीं रहने वाले हैं। चूंकि इंदौर जिले से हार्डिया एकमात्र मंत्री हैं, तो उनकी बात को तवज्जो देना भी संगठन की मजबूरी होगा।

अब तक इंदौर में भाजपा का सबसे ताकतवर शक्ति केंद्र कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला का रहा है। इस गुट ने अपनी मनमानी के आगे संगठन को कांख में दबाकर रखा है और आज भी नगर निगम चुनाव की तैयारी में यह गुट सबसे आगे चल रहा है।

इंदौर का क्षेत्र क्रमांक 2 ही नहीं, इस गुट के लोगों ने शहर के सारे क्षेत्रों में अपनी जमावट कर रखी है। महापौर सहित पार्षदों के टिकट बंटवारे में संगठन को इस गुट से ही दो-दो हाथ करना होंगे। लोकसभा चुनाव में अपनी ताकत की झलक दिखा चुके मंत्री-मेंदोला के गुट ने निगम चुनाव के लिए काफी दूरदर्शिता अपनाई है। सारे जिले में भाजपा की जितनी भी बैठकें और स?मेलन नहीं हुए, उससे दोगुना क्षेत्र क्रमांक 2 में हो चुके हैं।

भाजपा में दूसरा शक्ति केंद्र महापौर और ताई गुट का रहा है। नगर की प्रथम महिला होने के नाते डॉ. उमाशशि शर्मा को सांसद सुमित्रा महाजन का तगड़ा साथ मिल जाने से इस गुट की ताकत बढ़ी है। नगर अध्यक्ष सुदर्शन गुप्ता भी क्षेत्र क्रमांक 1 से विधायक बन जाने के बाद उनका भी परोक्ष समर्थन महापौर को मिलता रहा है और इसलिए क्षेत्र क्रमांक 2 के अलावा महापौर बाकी क्षेत्रों में विकास कार्यों का उद्‌घाटन कर रही हैं ताकि श्रेय उन्हें मिल सके, परंतु चुनावी मैनेजमेंट में वे भाई के गुट के पासंग में भी नहीं दिख रही हैं, परंतु विधानसभा चुनाव में क्षेत्र क्रमांक 3 से गोपीकृष्ण नेमा की हार ने इस गुट को अपना गिरेबां दिखा दिया है। ताई समर्थकों की हमेशा यह कमजोरी रही है कि वे बिना तैयारी के भाई के गुट के सामने खड़ी हो जाती हैं और यही उनकी मात का कारण भी होता है। क्षेत्र 3 और 4 से भी विजवर्गीय-मेंदोला गुट अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में ताकत जरूर दिखाएगा, जिसका मुकाबला करना संगठन सहित सभी गुटों को  भारी पड़ेगा।

इंदौर भाजपा अब तक इन्हीं दो गुटों की लड़ाई में बंटी रही और महेंद्र बाबा भाई और ताई दोनों को साथ में लेकर चलते रहे, जिसके कारण वे मंत्री पद भी पा गए, परंतु उनके मंत्री बनते ही भाजपा में एक तीसरा शक्ति केंद्र भी खड़ा हो गया है। महेंद्र हार्डिया के भी कट्टर समर्थकों की कोई कमी नहीं है, जिनकी मेहनत से हार्डिया लगातार विधायक बनते रहे हैं। ऐन चुनाव के वक्त हार्डिया के मंत्री बनने से पार्षद बनने की लालसा रखे उनके समर्थकों की बांछें खिल गई हैं। हार्डिया जिले से एकमात्र मंत्री हैं, तो वे पूरे शहर की नहीं तो कम से कम अपने पट्‌ठों को तो टिकट दिलाने के लिए अड़ेंगे ही। हार्डिया, विजयवर्गीय, मेंदोला, लक्ष्मणसिंह गौड़ के लगातार चुनाव जीतने के पीछे उनके कार्यकर्ताओं की फौज ही रही है। विजयवर्गीय, मेंदोला व स्व. लक्ष्मणसिंह गौड़ को तो अपने कार्यकर्ताओं को निहाल करने के बहुत मौके मिले और उन्होंने उसे चूका भी नहीं। विधायक मालिनी गौड़ इस गुटबाजी में कितना दम भर पाएंगी, यह तो वक्त बताएगा, परंतु सब जानते हैं कि घाघ लोगों की इस लड़ाई में जूझना उनके बूते में नहीं है। महेंद्र हार्डिया के लिए यह पहला मौका है कि वे अपने समर्थकों को उपकृत कर सकें।

हालांकि इस विधानसभा चुनाव के परिसीमन में महेंद्र हार्डिया को क्षेत्र क्रमांक 2 का भी एक बड़ा हिस्सा मिला है। इसलिए वे मेंदोला गुट से भी तालमेल बैठा सकते हैं, परंतु यह तो तय है कि हार्डिया गुट इंदौर भाजपा में बने रहने के लिए अपनी ताकत संगठन को दिखाना ही होगी। उधर, राऊ से जीतू जिराती मंत्री गुट से कोई बाहर जाने वाला नहीं है, इसलिए राऊ में वही होगा, जो जिराती चाहेंगे।

- अशोक निमराणियां

Add comment

Security code
Refresh