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पूरी-अधूरी मुराद

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हमीदा बी को विधवा पेंशन का कार्ड बनाकर देने के आदेश

कई मंगलवार से कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में बड़े साहब से मिलने के लिए धक्के खा रही हमीदा बी की आखिरकार कल मुराद पूरी हुई।

इंदौर : नगर प्रतिनिधि

कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव ने आश्वासन दिया कि उसकी विधवा पेंशन जल्दी शुरू हो जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को हमीदा बी की विधवा पेंशन का कार्ड बनाने का आदेश दिया। हमीदा बी को अगले मंगलवार बुलाया है। अब उसे धक्के नहीं खाने पड़ेंगे।

राजेश पिता अमरचंद भी कल आए थे, जो खातीपुरा में रहते हैं। आठ महीने पहले गांधी हॉल में विकलांगों के लगे शिविर में राजेश को ट्रायसिकल का आश्वासन दिया गया था। तब से धक्के खाने के बाद भी उसे ट्रायसिकल नहीं मिल पाई। एक मामला अपने ही बड़े भाई और भतीजे द्वारा रुपए हड़प लेने का था।

भाई ने हड़प लिए प्लाट के पैसे
नंदननगर निवासी महेश पिता प्रेमचंद राठौर जो दोनों पैरों से विकलांग हैं ने अपना प्लाट बेचा था। उसका आरोप है कि उसकी पूरी रकम बड़े भाई दशरथ और भतीजे मनोज राठौर ने हड़प ली। थाना चंदननगर में कई बार शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

जैसा कि हर बार होता है कि कलेक्टर और कुछ अधिकारी तो जनसुनवाई के दौरान भीड़ से घिरे हुए थे और हमेशा की तरह पीछे बैठे बाकी अधिकारी आराम फरमा रहे थे। एमपीईबी के सुप्रीडेंट इंजीनियर राजकुमार शर्मा, कृष्णमुरारी व्यास इतनी तसल्ली से बैठे थे मानो जनसुनवाई से उन्हें कोई वास्ता ही नहीं हो। विधिक विभाग की शशि शर्मा भी इनमें से एक थीं। आबकारी उपायुक्त विनोद रघुवंशी को फुर्सत के क्षणों में शोर-शराबे के बीच झपकी लग गई। जब उनसे किसी ने कहा कि आपका फोटो लिया है, तो उनका कहना था कि 102 डिग्री बुखार में यहां बैठा हूं, आप फोटो छापकर देखिए। कुछ अधिकारी अखबार पढ़ने में व्यस्त थे तो कुछ मोबाइल से खेलने में। एक अधिकारी ऐसे भी थे, जो हथेलियों से चेहरा ढंककर नींद ले रहे थे। 

क्या होगा इन बच्चों का...
आठ साल की करिश्मा और छह साल का अनुराग सिकंदराबाद कालोनी से अपनी मौसी निर्मला पति उमेश वाधवा के साथ जनसुनवाई में लाया गया। इन बच्चों की मां मानसिक रोगी है और पिता इन्हें छोड़कर जा चुका है। मां मीना और पिता अशोक वाधवानी को ही जब सुध नहीं तो इन बच्चों को कौन पाले। कल इनकी मौसी इस उम्मीद से इन्हें यहां लाई थी कि इन्हें किसी आश्रम में भेज दें।

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